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वार्षिक राशिफल -2010

राशिफल : यह राशिफल जन्मराशि पर आधारित है। अगर विंशोत्तरी दशा शुभ चल रही हो तो शुभ प्रभाव में कमी आ जाएगी। जन्म नक्षत्र पर आधारित जो नाम होता है यदि उसके अतिरिक्त किसी ने नाम रख लिया है तो यह राशिफल उस पर लागू नहीं होगा। आपके जन्म समय चन्द्रमा जिस अंक पर थे, वही आपकी राशि कहलाएगी। इस राशिफल कथन में नक्षत्र ज्योतिष का प्रयोग किया गया है।
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मेष

कठोर परिश्रम से ही कार्यक्षेत्र में सफलता मिलेगी। अहंकार को त्यागें तथा वाद-विवाद से बचें। मंगलवार एवं शनिवार को सुन्दरकाण्ड का पाठ करें। 9 सितम्बर से शनिदेव की अनुकूलता वरदान साबित होगी। विघ्न-बाधाओं का शमन होगा। शत्रुओं पर विजय मिलेगी। देवगुरु बृहस्पति को प्रसन्न करने के लिए गुरुवार का व्रत करें और केले के वृक्ष का पूजन करें। सालभर राहु और केतु भी पीडा देंगे। इनके अरिष्ट के शमनार्थ लाजवर्त को चाँदी की अँगूठी में मध्यमा अंगुली में पहनें। शिवजी पर ताँबे का सर्प चढायें।
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तुला

शनिदेव आप पर 9 सितम्बर तक मेहरबान रहेंगे। उनकी कृपा से आपको अनेक प्रकार से लाभ होगा। पद-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। 9 सितम्बर से शनि की साढेसाती शुरू होकर समस्यायें पैदा करेगी अतएव आप अपने जरूरी काम इसके पूर्व निपटा लें। देवगुरु बृहस्पति मानसिक तनाव देंगे। गुरुवार के दिन बेसन के 5 लड्डू दान करें। धर्मस्थान में सफाई-सेवा करने से आत्मिक शान्ति मिलेगी। राहु-केतु के द्वारा उत्पन्न निराशा का अंधकार शिवार्चन और रुद्राभिषेक से दूर होगा।
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वृष

सितम्बर तक शनि की ढैय्या चित्त को अशान्त रखेगी। कलह-क्लेश से बचना हितकर रहेगा। काले घोडे की नाल का छल्ला मध्यमा अंगुली में धारण करने से राहत मिलेगी। देवगुरु बृहस्पति की अनुकम्पा से निराशा के अंधकार में आशा का दीपक जलेगा। राहु धर्म से विमुख करने का प्रयास करेगा किन्तु आस्था को डिगने न दें। तीर्थयात्रा से भाग्योदय होगा। केतु मनोबल बढाकर संघर्ष करने की शक्ति देगा। भगवान श्रीकृष्ण की आराधना से मनोकामना पूर्ण होगी।
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वृश्चिक

कार्यक्षेत्र में समस्याओं का सामना करना पडेगा। स्वजनों से सामंजस्य बैठायें। 9 सितम्बर से शनि की अनुकूलता आपके सारे दु:ख दूर कर देगी। अप्रत्याशित लाभ होगा। बहुत समय से रुका हुआ काम पूरा होगा। देवगुरु बृहस्पति की अनुकम्पा से अविवाहितों की शादी होगी। भाग्योदय होगा। राहु मनोबल पुष्ट करके पुरुषार्थी बनाएगा। केतु काफी यात्रा करवायेगा। पुरुष त्रिधातु की मुद्रिका विधिवत् धारण करें। स्त्रियां मंगलागौरी की आराधना करें।
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मिथुन

शनिदेव की कृपा से नौकरी में पदोन्नति तथा व्यवसाय में लाभ होगा। आप अपने महत्वपूर्ण काम 9 सितम्बर से पहले निपटा लें इसके बाद शनि की ढैय्या चलेगी और तब समस्यायें आयेंगी। देवगुरु बृहस्पति के प्रकोप को शान्त करने के लिए गुरुवार के दिन 5 केलों का दान करें तथा केले की जड धारण करें। लक्ष्मी सहित नारायण की उपासना से समस्या का समाधान होगा। राहु-केतु का अरिष्ट चाँदी का सर्प शिवलिंग पर चढाने और रुद्राभिषेक करने से दूर होगा।
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धनु

मनोबल की क्षीणता से मति और गति प्रभावित होगी। व्यर्थ की दौड-धूप में धन-श्रम का अपव्यय होगा। वाद-विवाद से बचें और सद्भावना से वैर पर विजय पायें। हर काम सोच-विचार कर करें। देवगुरु बृहस्पति समय-समय पर आपकी मदद करके आपको संकट से निकालेंगे। राहु-केतु की प्रतिकूलता किसी विपत्ति के आगमन की सूचना दे रही है। गुरुवार के दिन भगवान दत्तात्रेय अथवा उनके स्वरूप साईबाबा की आराधना करें तथा निर्धनों को भोजन करायें।
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कर्क

पारिवारिक समस्यायें बहुत परेशान करेंगी। आमदनी की अपेक्षा खर्च अधिक होगा। शनिवार के दिन दक्षिणमुखी हनुमानजी के दर्शन-पूजन से शनि की पीडा का शमन होगा। 9 सितम्बर को शनि की साढेसाती के विदा हो जाने पर बडी राहत मिलेगी। पुरुषार्थ फलीभूत होगा। प्रगति का मार्ग प्रशस्त होगा। देवगुरु बृहस्पति की कृपा से कुँवारों का विवाह होगा। राहु-केतु सालभर नित्य कोई न कोई उलझन सामने लाते रहेंगे। चाँदी की अँगूठी में मोती धारण करने से लाभ और आराम मिलेगा।
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मकर

विघ्न-बाधा का सामना करना पडेगा। प्रत्येक कार्य पूरी सावधानी के साथ करें। वाहन चलाते समय सतर्क रहें। नीलम अथवा उसका उपरत्न जामुनिया (एमीथिस्ट) मध्यमा अंगुली में धारण करने से तथा कौओं को नित्य कुछ खिलाने से शनिकृत अरिष्ट का शमन होगा। देवगुरु बृहस्पति सही निर्णय लेने में मदद करेंगे। मस्तक पर केसर का तिलक लगायें। राहु-केतु की प्रतिकूलता समस्यायें बढा सकती है। भैरवनाथ की उपासना करें और मृत्युंजय मंत्र जपें। क्रोध-आवेश में कोई निर्णय न लें।
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सिंह

शनि की साढेसाती आपको अनेक प्रकार से कष्ट देगी। स्वास्थ्य ठीक न रहने से कार्यक्षमता प्रभावित होगी। चित्त के उच्चाटित होने से मन किसी काम में न लगेगा। किसी अप्रिय घटना की आशंका है। शनिवार के दिन छाया-दान करें और नाव की कील का छल्ला मध्यमा अंगुली में पहनें। बृहस्पति के निमित्त हल्दी की गाँठ धारण करें। राहु मदद करेगा किन्तु केतु को अनुकूल बनाने के लिए कुत्ते को नित्य कुछ खिलायें। सूर्यनारायण को प्रतिदिन अर्घ्य दें। रविवार का व्रत करें।
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कुंभ

स्वजनों की भावनाओं को समझें और मतभेद दूर करें। असमंजस को त्याग कर योजनाओं को दृढता के साथ क्रियान्वित करें। 9 सितम्बर से शनि की ढैय्या का आगमन विपत्ति का सूचक है। शनिवार के दिन शनिदेव की अर्चना और व्रत करें। देवगुरु बृहस्पति के विमुख होने के कारण समस्यायें उग्र रूप ले सकती हैं। किन्तु केतु की सहायता से संकट टलेगा। राहु कोई बडी धन-हानि करवा सकता है। पुरुष मस्तक पर चंदन का तिलक और स्त्रियां केसर की बिन्दी लगायें।
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कन्या

शनि की साढेसाती चल रही है। इस समय आपको कोई न कोई समस्या निरन्तर पीडा देगी। किसी भी प्रकार का जोखिम न लें। विश्वासघात की आशंका है। शनिवार के दिन पीपल को जल चढाकर, उसका पूजन और दीप-दान करके सात परिक्रमा करें। शनि की वस्तुओं का दान करें। देवगुरु बृहस्पति और केतु विपरीत परिस्थितियों में आपकी मदद करेंगे। राहु संतान को कष्ट देगा। विद्यार्थियों की एकाग्रता भंग होगी। छात्र भगवती सरस्वती की आराधना अवश्य करें।
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मीन

शनि की अनुकम्पा से प्रगति होगी। शत्रुओं की पराजय से मन प्रसन्न होगा। परन्तु यह ध्यान रहे कि शनिदेव की यह कृपादृष्टि 9 सितम्बर तक ही है। उसके पश्चात कठिन परिस्थितियों से जूझना पडेगा अतएव आप अपने जरूरी काम 9 सितम्बर से पूर्व शनि के अनुकूल रहते ही निपटा लें। राशि के स्वामी बृहस्पति की छत्रछाया में आप सुरक्षित रहेंगे। किन्तु 1 मई से 30 जुलाई के मध्य कोई बडी समस्या आ सकती है। राहु-केतु मिला-जुला फल देंगे। भगवान गणेश की आराधना से मनोकामना पूर्ण होगी।
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